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कोठे की अक्का

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#कोठे_की_अक्का बाज़ार रोज़ से ज्यादा गर्म था। जिस तरफ देखो रौनक थी। डेनियल यूँ तो हर साल इंडिया आता था पर ऐसे नज़ारे उसे यहाँ कम ही देखने को मिलते थे। वो छः फिट से निकलते कद का, कोई 50 की उम्र का होते हुए भी 35 से ऊपर न लगता था। ऐसा था मानों टॉम क्रूज़ की हाइट बढ़ा दी गयी हो। उसे चावड़ी बाज़ार से निकलते ही दिल्ली बुरी और भीड़ भरी लगने लगती थी। वो दिल्ली के इस इलाके को किसी कसाई मुहल्ले सा समझता था; चारों तरफ़ मुर्गियां दौड़ रही हैं, लोग ज्यादा वजन वाली पहले खरीद रहे हैं। कोठो की श्रखलाओं से गुज़रता वो एक जगह ठिठका। पहली मंज़िल पर एक बमुश्किल 17 साल की लड़की, शरीर के ऊपरी हिस्से में न के बराबर कुछ पहने, चहलकदमी कर रही थी। ठीक उस कोठे के नीचे अच्छी खासी भीड़ जमा थी। कोई रिक्शे वाला उसी भीड़ में से चिल्लाया "इतने बड़े तो आज तक इनमें से किसी के नहीं देखे बे, क्या खाती है ये यार" प्रतिउत्तर मिला "वो छोड़, इसके सपने न देख, हज़ार रुपए से कम नहीं है इस वक़्त ये। वो भी बस एक बार का।" डेनियल उस कोठे की सीढ़ियां चढ़ने लगा तो एक दलाल बीच में रोकता हुआ बोला "सर आर यू गोइंग फ़ॉर दी गर्ल हु स्ट

Roohi Movie Review: हंसी का विस्फोट और हॉरर का मज़ाक बनाती है ये रूही

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रूही रिव्यू: औरत के साथ सबसे बड़ी समस्या है उसका औरतों से ही जलना और उन्हीं से नफ़रत करना। कहते ही हैं, औरत औरत की दुश्मन न होती तो संसार में कोई आदमी किसी औरत को तंग न कर पाता।  #MuddockFilms #DineshVijan Productions (Spoiler Alert) कहानी बागड़पुर से शुरु होती है। जहाँ ज़लज़ला____ नामक न्यूज़पेपर चलाते गुनिया भाई (मानव विज) टॉप के बदमाश हैं और दुल्हनों को किडनैप कर उनकी शादी कराते हैं। इन्हीं के अंडर काम कर रहे भंवरा (राजकुमार राव) और कट्टनी (वरुण शर्मा) मस्त मौला हाज़िर जवाबी प्रेस रिपोर्टर (?) हैं। भंवरा जहाँ ग्राउन्ड रिपोर्टिंग करता है वहीं कट्टनी एक हॉरर कॉलम लिखता है, पर उसका सारा इंटरेस्ट एस्ट्रोफिजिक्स (गैलक्सी, ब्लैकहोल व सोलर सिस्टम) में है। ट्विस्ट तब आता है जब इन दोनों को पहली किडनैपिंग के लिए बोला जाता है और वो किडनैपिंग रूही (जान्हवी) की करनी होती है। यहाँ ट्विस्ट टर्न्स और लाफ्टर की फुल डोज़ के साथ, कहानी एक हिल स्टेशन पहुँचती है जहां न नेटवर्क है और न ही कोई फैसिलिटीज़, बस भंवरा -कट्टनी हैं और हैं रूही-अफ़ज़ाना, रूही के अंदर बैठी ही एक चुड़ैल है।

भारत

#भारत फिल्म के बारे में कुछ भी बताने से पहले मैं ये क्लियर कर दूँ कि ये फिल्म भारत पार्टीशन से ज़्यादा कुएं का महत्व दर्शाती है। #स्क्रिप्ट - फिल्म शुरु होती है आज के युग से जहाँ भारत (सलमान खान) जो कि बुजुर्गवार हैं; उनकी दुकान एसोसिअशन चीफ (राजीव गुप्ता) खाली करवाकर पुरानी दिल्ली में मॉल बनाना चाहता है। पुरानी दिल्ली में मॉल? खैर, 15 अगस्त को भारत का जन्मदिन होता है और वो अपना जन्मदिन अटारी बॉर्डर के पास ट्रेन के साथ मनाता है। यहाँ बेहतरीन तरीके से फ़्लैश बैक शुरु होता है और भारत खुद नैरेट करता है कि कैसे वो मीरपुर लाहौर से दिल्ली आया लेकिन उन दंगो में उसकी छोटी बहन गुड़िया और पिता गौतम (जैकी श्रोफ़) वहीँ रह गये। फिर कैसे ‘मौत के कुएं’ (जो इसके बारे में न जानता हो वो बेझिझक पूछ ले) में स्टंट मैन बना और राधा (दिशा पटानी) और विलायती (सुनील ग्रोवर) से मिला। फिर एक हादसे के बाद वो डर गया और अरब में जाकर तेल के कुएं खोदने लगा। कुएं खोदने के लिए उसकी जॉब ‘मैडम सर’ (?) कुमुद रैना (कटरीना कैफ) ने लगवाई है वहां उन्हें प्यार हो जाता है फिर ज़लज़ला आ जाता है फिर कटरीना खुद उन्हें प्रोपोज करती हैं और

Tumbbad Movie Review by Siddharth Arora Sahar - अरे आओ न, तुमब्बाड़ जोगना है तुम्हे रे

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इंडिया में हॉरर फ़िल्म का एक ही पैटर्न था (जो हॉलीवुड से इंस्पायर्ड था) कि किसी पुरानी हवेली पर कोई श्राप है और एक-एक करके वो आत्मा सबको मार डालती है. अंत में रीज़न मिलता है कि उस आत्मा के साथ भी बुरा हुआ था. इस फिक्स्ड पैटर्न को तोड़ा पिछले महीने आई ‘स्त्री’ ने, उसका हॉरर प्लस कॉमेडी अपने टाइप में अनोखी फ़िल्म बनकर उभरी. लेकिन इस बीते शुक्रवार को ‘तुम्ब्बाड़’ ने हॉरर फिल्मों को एक और प्लाट दे दिया. आइये इस फ़िल्म के भले-बुरे पर एक निगाह मारें फ़िल्म- तुम्ब्बाड़ निर्देशक – राही अनिल बार्वे निर्माता – सोहम शाह, मुकेश शाह, अमिता शाह, आनंद एल राय पटकथा – मितेश शाह, आदेश प्रसाद, रही अनिल बार्वे, आनंद गाँधी बजट – 5 करोड़ (लगभग) अवधि – 104 मिनट्स ( एक घंटा 44 मिनट्स) Spoiler Alert कहानी – एक छोटे से गाँव तुम्ब्बाड़ के मंदिर से शुरु होती है| एक मंदिर जो अपने बच्चे के लिए बनाया गया है| उस बच्चे को एक वरदान है| उस मंदिर में रहता है एक बूढ़ा आदमी ‘सरकार’. जिसकी जागीर है वो मंदिर और वो बाड़ा (एक तरह की हवेली). सरकार ने एक विधवा (ज्योति मालशे) को अपनी ‘सेवा’ के लिए रखा हुआ है. साथ ही व